मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में OBC आरक्षण केस की सुनवाई मंगलवार को टल गई। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष मध्य प्रदेश शासन की तरफ से आवेदन पेश करते हुए बताया गया कि ओबीसी आरक्षण के संबंध में नियुक्ति विशेष अभियोजक न्यायालय के समक्ष पक्ष प्रस्तुत नहीं करेंगे।
SC से 5 याचिकाओं के स्थानांतरण के बाद 13 मई से 3 दिन तक होगी सुनवाई
सरकार की ओर से युगलपीठ को यह भी बताया गया कि ओबीसी आरक्षण के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय में सीधे तौर पर दायर 5 याचिकाओं का स्थानांतरण मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में नहीं किया गया है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद उन याचिकाओं के स्थानांतरण होने के बाद 13 मई से तीन दिनों तक (13,14 और 15 मई) सुनवाई के निर्देश जारी किये हैं।
गौरतलब है कि अशिता दुबे व अन्य की तरफ से ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने को चुनौती दी गई थी। आरक्षण के खिलाफ दायर याचिका में तर्क दिया गया था कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इंदिरा साहनी तथा मराठा आरक्षण के संबंध में दायर याचिकाओं में स्पष्ट कहा गया है कि आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा कुछ याचिका ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किये जाने के पक्ष में दायर की गयी थी। कुछ याचिकाओं में याचिकाओं में फार्मूला 87ः13 को चुनौती देते हुए 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर आपत्ति व्यक्त करते हुए दायर की गयी थी।
मध्य प्रदेश सरकार ने मामले को पहले सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित कराया था
पूर्व में मध्य प्रदेश शासन ने ओबीसी से जुड़े प्रकरण सुप्रीम कोर्ट स्थानांतरित करा लिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी 2026 को इन मामलों को वापस हाईकोर्ट को ट्रांसफर कर दिया था। याचिकाओं पर गत दिवस हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि ओबीसी आरक्षण के विपक्ष में लगभग 70 तथा पक्ष में लगभग 30 याचिकाएं दायर की गयी हैं।
युगलपीठ ने सुनवाई के बाद पक्ष व विपक्ष के पक्ष में तर्क प्रस्तुत करने के लिए याचिकाओं को अलग-अलग करने के निर्देश दिये थे। मंगलवार को हुई सुनवाई में राज्य शासन की ओर से बताया गया कि "सर्वोच्च न्यायालय में आर्टिकल 32 के तहत पांच याचिकाएं हाईकोर्ट में स्थानांतरित नहीं हो पाई हैं।" इस पर युगलपीठ ने अगली सुनवाई के लिए 13 मई का आदेश दे दिया। ओबीसी आरक्षण के विपक्ष में वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी तथा सरकार की तरफ से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता केएम नटराजन पैरवी के लिए उपस्थित हुए।
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